1. Hindi News
  2. विदेश
  3. एशिया
  4. 'इन कागजी समझौतों से नहीं मिलेगी सुरक्षा', पाक-तुर्किये के साथ सऊदी अरब की डिफेंस डील पर ईरान का तंज

'इन कागजी समझौतों से नहीं मिलेगी सुरक्षा', पाक-तुर्किये के साथ सऊदी अरब की डिफेंस डील पर ईरान का तंज

 Written By: Niraj Kumar
 Published : Aug 08, 2026 07:09 am IST,  Updated : Aug 08, 2026 07:49 am IST

ईरान ने सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच हुए नए रक्षा समझौते पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान का कहना है कि यह कागजी समझौता सऊदी अरब को स्थायी सुरक्षा नहीं दे सकता।

sudia arab, pakistan, turkey- India TV Hindi
समझौते पर हस्ताक्षर करते सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान के राष्ट्राध्यक्ष Image Source : AP

Highlights

  • सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच संयुक्त रक्षा समझौता
  • किसी एक देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा
  • रक्षा साझेदारियों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा सऊदी अरब

पाकिस्तान और तुर्किये के साथ सऊदी अरब की डिफेंस डील पर तंज कसते हुए ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि ये कागजी समझौते उसे स्थायी सुरक्षा नहीं दिला सकते हैं। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के सदस्य इब्राहिम रजाई ने कहा कि पाकिस्तान और तुर्किये के साथ हुआ कोई भी सुरक्षा समझौता सऊदी को स्थायी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- "सऊदी को पता होना चाहिए कि तुर्की और पाकिस्तान के साथ एक पेपर एग्रीमेंट से उन्हें सिक्योरिटी नहीं मिलेगी, ठीक वैसे ही जैसे सालों तक अमेरिकियों की एकतरफ़ा निर्भरता से उन्हें सिक्योरिटी नहीं मिली।" उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर सऊदी अरब अपनी पॉलिसी में सुधार करता है, तो उसे दूसरों से सिक्योरिटी के लिए "भीख" मांगने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

क्या है मक्का संयुक्त रक्षा समझौता?

दरअसल, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने मक्का में एक ऐतिहासिक 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' पर साइन किया है। इस डिफेंस डील के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने पर उसे तीनों पर हमला माना जाएगा। समझौते का उद्देश्य सामूहिक रक्षा क्षमता और प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी युवराज (क्राउन प्रिंस) मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने मक्का के अल-सफा पैलेस में हुई एक बैठक के दौरान संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। तुर्किये सरकार के एक अधिकारी ने इस समझौते को ''पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति'' का बताया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने केवल रक्षा के क्षेत्र में एक-दूसरे को समर्थन देने का वादा किया है।

संयुक्त बयान में क्या कहा गया?

संयुक्त बयान में कहा गया है कि मक्का समझौता "तीनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक संबंधों से प्रेरित है। यह भाईचारे और इस्लामी एकजुटता के मजबूत बंधनों पर आधारित है जो उन्हें जोड़ते हैं, और यह उनके साझा रणनीतिक हितों और लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग को और आगे बढ़ाता है।"

सऊदी अरब ने क्या कहा?

वहीं सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता किसी सैन्य गठबंधन या धार्मिक आधार पर बने गुट की शुरुआत नहीं बल्कि इसका मकसद रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना और आपसी सहयोग को बढ़ाना है। यह समझौता परमाणु गतिविधियों या हथियारों की होड़ से जुड़ा नहीं है। इससे अन्य देशों के साथ सऊदी अरब के मौजूदा रणनीतिक संबंधों पर असर नहीं पड़ेगा। 

नाटों से क्यों की जा रही तुलना?

इस समझौते की नाटो से इसलिए तुलना की जा रही है क्योंकि नाटो देशों के बीच भी सुरक्षा को लेकर समझौता है। अगर नाटो के किसी एक देश पर हमला होता है तो इसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाता है और सभी साथ मिलकर लड़ते हैं।

ये भी पढ़ें:

इजरायली सूत्रों का दावा- खामेनेई की हालत गंभीर, अस्पताल में हैं भर्ती; कहा- 'शहीद होने की खबर मिले तो हैरानी नहीं'

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Asia से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें विदेश